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“여러분한테 드리는 약속” 임마누엘의 대통령 (임시)

“여러분한테 드리는 약속” 임마누엘의 대통령 (임시)

임마누엘의 대통령 출마는 진보주의나 보수주의 가면 뒤에 숨어서 연쇄 살인범처럼 무자비하게 세상을 파괴하는 글로벌 금융 자본의 이해 관계가 미국을 점령하는 것을 더 이상 두고볼 수 없는 평범한 시민 들을 위해서입니다.

오늘 이 캠페인에 참여하셔서 투자 은행이나 다국적 기업으로부터 자금을 한 푼도 받지 않는 진정한 무소속 후보인 임마누엘 페스트라이쉬를 미국 대통령으로 선출하는 데에 함께 해주시기 바랍니다.

임마누엘은 다음과 같이 선언합니다.

 “미국은 정신병 환자가 지배하는 독재 국가가 아닌 민주 공화국입니다.

저는 대통령으로 당선될 있습니다. 저는 극도의 빈곤 속에서 삶을 끝낼 수도 있지만 그것은 부끄러워할 일이 아닙니다. 저는 어쩌면 날조된 혐의로 인해 감옥이나 정신 병원에 갇히거나 강에 상태로 발견될 수도 있습니다. 그러나 그러한 부분은 전혀 중요하지 않습니다.

제가 약속드리는 것은 워렌 버핏, 게이츠, 엘론 머스크, 제프 베조스를 비롯해 워싱턴, 베를린, 도쿄, 모스크바, 런던, 베이징의 기술 폭군(techo-tyrant)들과 바이오 파시스트들이 몰락 것이라는 것입니다. 그들은 처벌을 받을 것이고 그들의 범죄가 낱낱이 세상에 알려질 것입니다. 그들이 소유하고 있다고 주장하는 재산 규모와 그들을 대변하는 정치인 그들의 충견 노릇을 하는 유명인사들과 권위자들의 수가 얼마인지 우리는 전혀 개의치 않습니다

미국의 임시 정부 선언

미국의 임시 정부가 필요한 이유는?

현재 위기 상황에 대한 불가피한 대책입니다

임마누엘 페스트라이쉬

한 때 헌법에 따라 국민들에게 정보를 제공하는 것을 의미했던 언론사의 뉴스들이 이제는 바이든 행정부 하에서 미국이 정상으로 회복 중이라는 얘기를 마치 최면을 걸듯이 반복하고 있습니다.  

하지만 대부분의 평범한 관찰자가 보기에는 보이지 않는 세력이 미국 및 전세계에서 모든 차원에 걸쳐 유례없는 전체주의적 통치를 하고 있음이 분명합니다.

미국 헌법 제1조의 권위는 대통령들과 하버드대 교수들의 의견, 정보 및 군사 전문가들의 통찰, 억만장자들의 발언에 앞서서 가장 우선합니다.

“연방의회는 언론, 출판의 자유나 국민들이 평화로이 집회할 수 있는 권리 및 불만 사항의 구제를 위하여 정부에게 청원할 권리를 제한하는 법률을 제정할 수 없다.”

그러나 연방의회는 언론의 자유를 제한하고 출판의 자유를 억압하며 평화로운 집회를 금지하는 한편 정부에 청원할 권리를 종식시키는 법들과 다수의 비밀 규정들을 통과시켰습니다. 연방 행정부와 사법부는 범죄적 행정 구조의 제정 및 유지를 위해 공모했습니다.

더 중요한 것은 가까운 장래에 부유층과 권력층이 자기가 조종하는 연방정부를 통해서 더욱 억압적인 범죄적 행정 구조의 제정을 계획하고 있는 것입니다.

아니요! 우리는 더 이상 기다릴 수 없습니다. 우리는 위선적인 정치인들이 허용하는 주말에 가벼운 시위를 조직하거나 커피를 마시면서 불평만 할 수 없습니다.

아니요! 우리는 헌법이 회복되고 부유층과 권력층을 정치 결정과정에서 제어할 때까지 헌법에 의거해 적법한 임시 정부를 수립한 다음 그 임시 정부에게 당분간 미국을 관리할 권한을 위탁 해야 합니다.

연방 정부의 붕괴로 인해 그러한 심각한 혼란에 빠졌기 때문에 우리에게는 정부를 참칭하는 사람들의 법적 권위에 대한 의문을 제기하고 헌법적, 도덕적 대안을 준비하는 것 외에는 선택권이 없습니다.

건국의 아버지들은 그런 위기 상황에서 우리의 대응방법을 독립선언서에서 명확하게 설명하고 있습니다.

그 독립선언서는 헌법의 토대이며 헌법은 미국의 모든 합법적 통치를 지지하는 법적인 골격을 형성합니다.

정부가 헌법 밖에서 운영된다면 더 이상 정부가 아니라 정부로 가장한 범죄 조직입니다. 오늘부터 우리의 향후 모든 단계에서 이 중요한 차이를 널리 알려야 합니다.

헌법 밖에서 운영된 정부에 대하여 독립선언서는 다음과 같이 명시하고 있습니다.

 “그러나 오랫동안에 걸친 학대와 착취가 변함없이 동일한 목적을 추구하고 국민을 절대 전제 정치 밑에 예속시키려는 계획을 분명히 했을 때에는 이와 같은 정부를 타도하고 미래의 안전을 위해서 새로운 보호자를 마련하는 것은 국민의 권리이며 또한 국민의 의무인 것이다.”

우리는 현재 정치의 혼란을 부정하지 않습니다. 이러한 냉소적인 정치 게임을 하지 않을 것입니다. 우리는 권위 있는 기관에 대한 국민의 신뢰를 악용해 국민을 속이고 그들을 노예화 하지 않습니다. 우리는 국민을 정신적, 육체적으로 파괴하지 않을 것입니다.

바이든과 트럼프는 퇴폐적이고 나르시시즘적인 정치 문화 속에서 붕괴되어 가는 통치 체제에 사로 잡혀 있습니다. 그들이 그렇게 행동하는 이유는 대부분 그들이 더 큰 힘에 의해 그렇게 하도록 강요 받고 있다고 느끼기 때문입니다.

우리는 그들을 비난할 의도가 없습니다. 우리는 그들의 시도를 존중하고 그들이 겪은 어려움을 인정합니다.

하지만 트럼프와 바이든 모두 다음과 같은 미국의 세 가지 핵심 문제들을 공개적으로 다루지 않았습니다.

  1. 9.11 사건으로 알려진 미국에 대한 가짜 깃발 공격을 만들고 미국을 고통스럽게 만든 해외 전쟁으로 끌어들인 국내외 범죄 작전.
  • 2020년 1월부터 9월 사이에 다국적 투자은행 및 기타 글로벌 금융조직들이 10조에서 15조 달러에 이르는 금액을 연방정부로부터 절취.
  • COVID19로 알려진 거짓 ‘전염병’을 통해 국민의 자유를 파괴하고 범죄적 차단 및 격리조치를 실행하며 연방정부로부터 훔친 권한을 이용해 다국적 기업들이 만든 위험한 ‘백신’을 홍보하고 강제 접종을 시키는 계획.

그러한 대규모 범죄에 대한 침묵은 그들이 공모자이며 두 사람 모두 대통령으로 봉사하기에는 실격임을 입증합니다.

저는 대선에서 위에서 언급한 모든 범죄 음모를 다루고 부유층과 권력층의 자금을 거부했으며 평범한 미국인들과 함께 공동선과 진실 의 추구 및 도덕을 위해 노력했던 유일한 후보자로서 법치가 회복되고 헌법에 따라 국가를 다스릴 수 있을 때까지 제가 미국 임시 정부의 대통령으로 봉사할 최적임자라고 생각합니다.

저는 헌법과 독립선언서에 의거해 이러한 위기에서 강탈자나 사기꾼 또는 가식자가 아닌 미국 임시 정부의 대통령으로 일할 것을 약속합니다.

저의 역할은 바로 로마 시대의 킨키나투스 집정관이 위기 상황에서 통치자 역할을 하기 위해 일어났던 것과 유사할 것입니다

킨키나투스는 자신에게 더 큰 야망이 없음을 명확히 밝혔으며 자신의 역할이 끝났을 때 조용히 은퇴하고 농장으로 돌아갔습니다.

हम बुराई से नहीं डरेंगे

हम बुराई से नहीं डरेंगे

Emanuel for President

हिंदी उपक्षेप

लोग अक्सर मुझसे पूछा करते थे की एशिया में मेरी रूचि कहा से शुरू हुई, चीन जापान और कोरिया के संस्कृतिओ में मेरी गहरी मुग्धता का उद्भव क्या थी और ऐसा क्या था जिसने मुझमे उन राष्ट्रों की उत्कृष्ट परंपराओं के सरोवर में डुबकी लगाने की अभिलाषा जगाई। वे लोग अक्सर आश्चर्यचकित हो जाते है की मेरी रूचि जापानी मांगा या चीन की  मार्शल आर्ट्स नहीं है, बल्कि बहुत ही छोटी उम्र से हिन्दू सभ्यता से मेरा संसर्ग है जिसने मुझे एक ऐसी असीम गहराई वाले वैकल्पिक सभ्यता से अवगत्त कराया जो साधारण और झूठी स्मारक से संक्रमित पश्चिमी सभ्यता को प्रतिस्थापित कर सके।

जब मैं छोटा था तब मेरी माँ मेरे लिए करी और पापड़ बनाया करती थी। वे मेरे पसंदीदा व्यंजन थे और अभी तक है। माँ अपने बिस्तर के किनारे शिव, कृष्ण और गणेश की छोटी शोभायमान मूर्ति रखा करती थी जो मुझे बचपन में बोहोत मोहित करते थे। वो मुझे अपने जंगल में देखे हुए बाघ, कलकत्ता के भीड़ भार वाले बाजार में घूमने के किस्से सुनाया करती थी। वे किस्से मेरे मन में प्राचीन मंदिर  के तीव्र धुप की तरह घूमते रहते थे।

मेरी माँ का जन्म लक्ज़मबर्ग में हुआ था, लेकिन उन्होंने बहुत कम उम्र में एक अंग्रेज से शादी कर ली और उनके साथ दार्जिलिंग चली गईं। वो शादी बहुत लंबे समय तक नहीं रहा, लेकिन मेरी माँ कलकत्ता में रहने लगी और एक योगी के साथ अध्ययन किया और  आध्यात्मिक गहराई की तलाश में सड़कों पर भटक रही थीं जो उन्हें यूरोप में नहीं मिला।

यह भारत के वे अनमोल टुकड़े थे जिसने मेरे ज़िन्दगी में आ कर मुझे मानव अनुभूति पर अन्य परिप्रेक्ष्य के लिए बीथोवेन और कांट से परे देखने के लिए प्रेरित किया। विश्वविद्यालय में मेरी चीनी संस्कृति में रुकी बढ़ी और मैंने जापान और कोरिया को शामिल करने के लिए स्नातक विद्यालय में उस अनुसंधान को बढ़ाया। फिर भी, मैंने जहा भी उस संस्कृति को देखा मुझे प्राचीन भारतीय शास्त्र के  चमकते हुए गहने ही दिखे। चीन जापान और कोरिया में मुझे बहुत कम खिड़कियां मिलीं जो मेरे बचपन के अनुभवों से मिली प्रकाश के माध्यम से निकलती थीं। भारत मेरे लिए और भी महत्वपुर्ण हो गया जब मैं इलिनोइस विश्वविद्यालय में “एशियाई लिटरेचर” का प्राध्यापक बना। चाहे वो गाँधी के प्रेरणादायक शब्द हो, जिसे मैंने कई बार पढ़ा और खुद से पूछा की इतनी अस्थिरता और अत्याचार के युग में इतने बुद्धिमान वक़्ती की क्या भूमिका होगी, या कालिदास द्वारा रचित शकुंतला की लुभावनी बोली जिसे मैंने सर्वेक्षण पाठ्यक्रम पढ़ाते वक़्त अनजाने में ढूंढ निकाला था। शकुंतला ने एक शक्तिशाली कर्म चक्र का उल्लेख किया है जो मानव अनुभव के हर पेहलु को जोरता है और मेरी अपनी वास्तविकता की धारणा को बदल देता है।

बाद में, जब हमने सीओल और वाशिंगटन डी.सी. में एशिया इंस्टिट्यूट शुरू किया, भारतीय बौद्धिक लखविंदर सिंह ने विश्व शान्ति के हमारी लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरे विचारशील भारतीयों के साथ हमने भारत और दुनिया में उसके विकट भूमिका पर कई सेमिनार आयोजित किये। हमने हाल ही में भारत और कोरिया के किसानो  के साथ अपने सभ्यता के भविष्य के बारे में बातचीत की।

तो, मेरे प्रशासन में यूनाइटेड स्टेट्स और भारत के क्या संबंध रहेंगे?

मैं आपको ये बताता हूँ की यूनाइटेड स्टेट्स और भारत के संबंध क्या नहीं होंगे।

यह भारतीय कर्मचारियो को बहुत ही कम तनख्वाह में बिना किसी पेंशन या स्वास्थ्य सेवा के  वैश्विक रकम का उपयोग करके मुनाफे के लिए काम करने पर मजबूर नहीं करेगी, जिससे बैंको और व्यापारसंध के सी.इ.ओ को भारत और यू.एस. में अत्यधिक लाभ हो।

ये अरबपतियों के लिए नहीं होगा जो बिना कुछ किये पैसे कमाते है और उन पैसो का उपयोग भारतीयों के पवित्र भूमि को खरीदने क लिए करते है जिसमे उन्होंने हज़ारो वर्षो तक खेती की है और उन्हें मजबूर कर दिया है की वे प्राधिकरण द्वारा निर्धारित आये पर, और आयातित कीटनाशक, खाद और यंत्रीकृत उपकरण जो की मनुष्य की ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे है और हमरे मिट्टी और पानी को दूषित करते है, उनपे आश्रित रहे।

यह अत्यधिक कीमत वाले हथियारो के लिए नहीं होगा जो हमारे देश को उसके वास्तविक शत्रुओ से रक्षा करने के जगह, अमीर को और अमीर बनाते है और उन्हें हमारे ऊपर और भी अधिक शक्ति देते है।

यह “फ्री ट्रेड” या “मुफ्त व्यापार” के लिए नहीं होगा जो की कीमती वस्तुओ के निर्यात को कहा जाता है, जिसे अपने घर में रहना चाहिए, एक बहुत ही कुकर्म जो वैश्विक निर्भरताएँ को बढ़ावा देता है और हमारे देशीय आत्मनिर्भरता को नष्ट करता है।

दीर्घावधि में भारतीय लोगो और अमेरिकन लोगो, भारतीय नदी, पर्वत, भारतीय मिट्टी की हित को महत्त्व मिलना चाहिए। यदि कोई सौदा शक्तिशाली और अमीरो को और धनी बनाये किन्तु भारत को दीर्घावधि में नुकसान पहुँचाए को उसे अभी रोक देना चाहिए।

निजी तौर पर, मुझे नहीं लगता कि यूनाइटेड स्टेट्स के पास भारत को सीखने के लिए ज़्यादा है। हमारे बिदेशी युद्धों ने हमे नैतिक और आर्थिक रूप से ऋणशोधनाक्षम कर दिया है। हमने टैकनोलजी का दुरूपयोग किया जिससे हमारी ध्यान केंद्रित करने कि योग्यता और सोचने कि क्षमता नष्ट हो गयी। हमने सर्कार का निजीकरण कर दिया और वैश्विक रक़म के जानवर को अपनी राजधानी में घोसला बनाने की इजाज़त दे दी और अपने नेताओ को इसकी कटपुतली बनने दिया। हमारे देज़्श में बस दो दल बचे है: वेश्या और दलाल।

मुझे लगता है हम भारत से अनंत ज्ञान प्राप्त कर सकते है। हम प्राचीन भारत से स्थिरता, नम्रता, किफ़ायत, विनम्रता, और प्रकृति और परिवार क लिए प्यार सिख सकते है।

जहा हम अमेरिकन खुद को एक बुरे स्वप्न “खपत और निष्कर्षण के डिज्नीलैंड” से मुक्त करने के लिए संघर्ष कर रहे है, वही भारतीय विचार जैसे आत्मा “स्वयं”, कर्म “काम” और मोक्ष “मुक्ति” नैतिक मूल्य पर एक नयी विचारधारा जता रही है।

वर्त्तमान में ये हास्यास्पद लगता है की मेरे जैसा कोई जो इतिहास, दर्शनशास्र, साहित्य में इतनी रूचि रखता हो, वो सरकार में क्या ही भूमिका निभा पायेगा। किन्तु हमें ये पता है कि भारत में ये विषय, सरकार के लिए बहुत हि मुख्य माना जाता है। जैसे जैसे वर्त्तमान व्यवस्था का विनाश हो रहा है और हम अँधेरे में हर तरफ किसी समझदर व्यवस्था कि खोज में टटोल रहे है, मैं आशा करता हूँ कि आज के भारतीय और आज से ३००० वर्ष पूर्ब के भारतीय, इंसानियत, ब्रह्मांड के साथ मानवता का संबंध और ब्रम्हांड कि अपनी गहरी समझ को साझा करेंगे। हमे जो चाहिए वह यह संवाद है , नाकि कोई “फ्री-ट्रेड” संधि। अमेरिका रेगिस्तान में एक अथमरे इंसान कि तरह हो गया है जिसे मुट्ठी भर रेत की नहीं बल्कि एक कप पानी कि ज़रूरत है।

राष्ट्रपति के लिए ईमैन्युअल

अठारह-बिंदु प्लेटफ़ॉर्म

  1. हम ऐसे किसी चुनाव को मान्यता नहीं देंगे जो निष्पक्ष ना हो

वर्तमान चुनाव प्रणाली इस हद तक भ्रष्ट है कि वह अर्थहीन हो चुकी है। योग्य उम्मीदवार को मतदान की अनुमति ही नहीं है, और उसके विचार एवम् गतिविधियों को ऐसे मीडिया द्वारा अनदेखा किया जाता है जो आवश्यक जानकारी नागरिकों तक किसी कारणवश पहुँचाता ही नहीं है। वोटों की गणना कंप्यूटर से होती है जिन्हें हैक किया जा सकता है और जिनमें लोगों के विशुद्ध चुनाव का कोई प्रमाण तक नहीं बचता। जिन क्षेत्रों में दरिद्र लोग रहते हैं, वहाँ इतनी कम वोटिंग मशीनें हैं कि वृद्ध माता-पिता को घंटों लाइन में प्रतीक्षा करनी पड़ती है, शाम ढलने के साथ ठिठुरते हुए।

पिछला चुनाव हास्यास्पद था और डेमोक्रेटिक व रिपब्लिकन पार्टियाँ दोनों ही स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के शव पर मानो गिद्ध नज़र गड़ाए हुए थीं, बस दोनों के इरादे थोड़े अलग थे।

हम राष्ट्रपति, या किसी अन्य ऑफिस के लिए किये गए किसी भी चुनाव को तब तक वैध नहीं मानते जब तक कि वह राष्ट्र चुनाव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरीक्षित नहीं करवाता जिसमें प्रत्येक नागरिक को यह आश्वासन मिल सके कि उसका मताधिकार आसानी से सत्यापित किया जा सकता है, और जिसमें प्रत्येक योग्य उम्मीदवार उसकी नीतियों को सीधे लोगों के सामने रख सके। सम्पूर्ण चुनाव हर स्तर पर पारदर्शी होना चाहिए और वाणिज्यिक विज्ञापन पर प्रतिबन्ध होना चाहिए।

पिछली बार का चुनाव वैध था, लेकिन इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को रद्द करना हमारा नैतिक दायित्व है। मुझे इसकी चिंता नहीं है कि राष्ट्रपति की इस दौड़ में कोई अमीर व्यक्ति मुझे फंड नहीं देंगे, कोई राजनैतिक पार्टियाँ मेरा सहयोग नहीं करेंगी, अगला चुनाव इतना छलपूर्ण होगा कि किसी भी स्थिति में हम परिणामों को स्वीकार तक नहीं कर पाएँगे, या विजेता का दावा करने वालों को पहचान तक नहीं पाएँगे।

और फिर, जो लोग “निर्वाचित” हैं वे जल्दी ही यह सिद्ध कर देंगे कि वे कैसे भी “हम लोग (we the people)” शब्दों पर खरे नहीं उतर रहे। हम लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ेगी जब तक कि न्यायसंगत चुनाव नहीं होता, ऐसा चुनाव जिसमें योग्य उम्मीदवारों को भाग लेने दिया जायेगा।

  • 2. मौसम में बदलाव एक बड़ा सुरक्षा खतरा है;
    प्रतिक्रिया में देशी और विदेशी नीति के प्रत्येक पहलू शामिल होने चाहिए

       मौसम में बदलाव का शमन करने और अनुकूलन करने के लिए शत-वर्षीय योजना के प्रति जो पूर्ण प्रतिबद्धता है, उसे संयुक्त राज्य के लिए हर सुरक्षा, आर्थिक और शैक्षणिक नीति का केंद्र रखा जाना चाहिए। हमें इस योजना हेतु सभी संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिए, किसी युद्ध अर्थव्यवस्था के बराबर ही स्वयं को प्रतिबद्ध करना चाहिए, ताकि दो से तीन वर्षों में पेट्रोलियम और कोयले का उपयोग घटाकर शून्य पर लाया जा सके और प्लास्टिक व पेट्रोलियम-आधारित उत्पादों एवम् अन्य सामग्रियों के उपयोग को समाप्त किया जा सके।

       सरकार भविष्य के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी जिसमें जीवाश्म ईंधनों (फॉसिल फ्यूल) के उपयोग को शीघ्रता से कम करने, निजी ऑटोमोबाइल के उपयोग को समाप्त करने और हवाईजहाज के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग करेगी। हम आस-पास सभी जगह सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जनरेटर स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता देंगे। इस उद्देश्य के लिए सरकार इन तकनीकों के सभी बौद्धिक सम्पदा अधिकारों को पब्लिक डोमेन में रखेगी। इंसुलेशन और सौर व पवन ऊर्जा के लिए सभी इमारतों का तुरन्त उन्नयन (अपग्रेड) किया जायेगा, ताकि कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य पर लाया जा सके। सरकार लम्बी-अवधि लागत की गणना करके 50-वर्षीय लोन के माध्यम से ऐसा करेगी, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) तुरन्त जीवाश्म ईंधन से सस्ती हो जाएगी।

       हम कोयले, पेट्रोलियम और यूरेनियम की सभी सब्सिडी बंद कर देंगे। इन ईंधनों को नियंत्रित पदार्थों की श्रेणी में रख दिया जायेगा जिन्हें लाभ के लिए बेचा या खरीदा नहीं जा सकता।

       पूरे राष्ट्र की तुलना में सेना 100% नवीकरणीय ऊर्जा में ज्यादा जल्दी बदल जाएगी और यह इकोसिस्टम का सबसे सशक्त रक्षक बन जाएगी, ऑइल युद्ध, या बेकार जिओइंजीनियरिंग नहीं।

प्रदूषण फैला रहे लड़ाकू विमानों और पुराने हवाईजहाज वाहकों (एयरक्राफ्ट कैरियर्स) को तुरन्त बंद कर दिया जाएगा, बिना इसकी चिन्ता किए कि वे निगमों को काफी लाभ पहुँचा रहे थे। रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं में संक्रमण रोजगार के तहत जिन्होंने अपनी नौकरी गँवा दी है, हम उन्हें आश्वासन देते हैं। यहाँ तक कि, हम उन सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं जो नौकरी की तलाश में हैं।

पेट्रोलियम, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे जहरीले पदार्थ नागरिकों के बीच फैलाकर तेल और गैस निगम खरबों डॉलर कमा चुके हैं और उन्हें इस बात की पूरी जानकारी रही है कि इससे पर्यावरण दूषित हो रहा है। ऐसे कृत्य अपराधिक हैं। ऐसे निगमों और उनके मालिकों की सम्पत्ति को सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा और उस पूँजी को हमारी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में लगाया जाएगा। ऊर्जा, खाद्य पदार्थों और प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग घृणास्पद माना जाएगा जो कि वास्तव में है और इसे बेहतर जीवन के नाम पर कभी भी प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।

सरकार ही वास्तविक टिकाऊ नगरीय और उपनगरीय समुदायों के बनाने के कार्य का संचालन करेगी और जैव विविधता को सुनिश्चित करने के लिए वन्य प्रदेशों की पुनर्स्थापना का बेड़ा उठाएगी। इसका अर्थ है कि मॉल, पार्किंग की जगहों, कारखानों और फ्रीवे को हटा दिया जाएगा जिन्होंने हमारे पावन वन्य प्रदेशों और कीमती आर्द्रभूमि को अशुद्ध कर दिया है।

  • किसी भी प्रकार परमाणु हथियारों को समाप्त करना

       मानवता परमाणु युद्ध के अभूतपूर्व जोखिम का सामना कर रही है, जिसे “प्रयोज्य” छोटे परमाणु उपकरणों को बढ़ावा देकर और भी भयावह कर दिया गया है। यह एक दुखद उपहास है कि हम अब परमाणु ताकतों को बढ़ाने में खरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं जिसे बंद किया जाना चाहिए।

       हम स्वयं से प्रतिज्ञा करेंगे कि इन खतरनाक हथियारों को पृथ्वी से समाप्त कर देंगे, यह प्रक्रिया चाहे कितनी भी दर्दनाक क्यों ना हो। हमारे बच्चों की भलाई के लिए, हम जबरदस्ती जब्त करके सभी परमाणु हथियारों को विनष्ट कर देंगे, संयुक्त राज्य से शुरुआत करके विश्व के सभी देशों से। हम घर से और विदेशों से, सरकार के अन्दर और बाहर नागरिकों के प्रतिबद्ध समूहों को साथ लेकर कार्य करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि परमाणु हथियारों का उत्पादन बंद हो चुका है।

  • अतीत में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक जाँच शुरू करना जिसका सामना करने से कई लोग मना कर चुके हैं

       हम मौसम में बदलाव और परमाणु युद्ध के जोखिम से बचने में तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक कि हम इस नकारात्मक संस्कृति को बदल नहीं देते जिसने हमें पिछले बीस वर्षों से जकड़ा हुआ है। 2000 के चुनावों के बाद हमें एक छोटे से समूह द्वारा निर्भय जाँच करवानी होगी जिसमें वह तथाकथित “9/11” घटना भी शामिल है।

       जब हम अंतर्राष्ट्रीय “सत्य और सुलह” की स्थापना करें तो इसकी जाँच करने और हमारे नागरिकों व समग्र विश्व के सामने यह सत्य कथा लाने के लिए हमें वैज्ञानिक तरीकों की ताकत का भी उपयोग करना चाहिए। यह जाँच कितनी दूर तक जाए, इसकी कोई सीमा रेखा नहीं रखनी चाहिए। मामले की गम्भीरता को देखते हुए सारी सम्बन्धित सामग्री अवर्गीकृत होनी चाहिए। हमें उन प्रचलित कहानियों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए जो एक-दूसरे समूह को दोष देती हैं। ओरिएंट एक्सप्रेस पर हत्या एक ऐसा अपराधिक मामला था जिसे सुलझाया जा सकता था।

  • संयुक्त राज्य की सेना को वापस घर बुलाया जाए और उसे संयुक्त राष्ट्र में पदोन्नत किया जाए

       द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जिन सैन्य दलों को संयुक्त राज्य ने विश्व भर में तैनात किया था उनमें से अधिकांश को वापस बुला लेना चाहिए, धनाढ्य लोगों का स्वार्थ पूरा करने के लिए स्वार्थपूर्ण उद्यमों में उन सैन्य दलों का शोषण किया जाता है। हमें वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु लड़ने और मरने के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन विशुद्ध रूप से सिर्फ इसी कार्य के लिए जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित है। हमारे पैरों तले की जमीन की लालची ताकतों से रक्षा करने के लिए होने वाले युद्ध में हमारी जान को जोखिम में डालना बेहतर रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे महासागरों का शुद्ध जल विषाक्त ना हो जाए, और वनों को सदा के लिए सुरक्षित किया जा सके, बजाय इसके कि बहुराष्ट्रीय निगमों के हित में संसाधनों से सम्बन्धित व्यर्थ के युद्ध लड़े जाएँ।

       हमारे नाजुक ग्रह के भविष्य के विषय में योजना बनाने और फिर उन्हें लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्राथमिक स्थान होना चाहिए। वरना हमें वैश्विक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर कार्य करना होगा। यह प्रक्रिया केवल तभी सफल हो सकती है जब संयुक्त राज्य और संयुक्त राष्ट्र का सम्पूर्ण सुधार हो जिससे वे पृथ्वी के समस्त नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए सशक्त हो जाएँ जिसमें निगमों या धनाढ्य व्यक्तियों का कोई हस्तक्षेप ना हो।

  • निगम जनसमुदाय नहीं हैं;
    अमीरों का भी एक ही वोट होता है

       निगम जन-समुदाय नहीं हैं और नीति बनाने में उनकी कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। ये ही बात अति-धनाढ्य लोगों, और उन निवेश बैंकों के लिए भी लागू होती है जिनके माध्यम से वे अपनी इच्छाएँ पूरी करते हैं। नीति निर्माण करने वालों को आवश्यक जानकारी आजीवन नागरिक कर्मचारियों, प्राध्यापकों और ऐसे अन्य निष्णांतों से मिलनी चाहिए जो बिना किसी लाभ के हमारे देश की वर्तमान स्थिति में उत्थान के लिए कार्यरत हैं।

       धनाढ्य लोग सिर्फ इंसान हैं; उनके पास किसी अन्य से ज्यादा कोई अधिकार नहीं हैं। नीति निर्धारण में उन्हें कोई विशेष भूमिका नहीं दी जानी चाहिए। जो नीति को प्रभावित करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पैसे का उपयोग करते हैं, वे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में संलग्न हैं। हमें “सलाह” और “पक्ष जुटाव” जैसे स्वच्छ शब्दों का उपयोग करके इन अपराधों पर पर्दा नहीं डालना चाहिए।

       हमें नागरिक सेवाओं को सशक्त बनाना चाहिए ताकि सरकार पुनः निगमों से अपनी स्वतंत्रता हासिल कर सके और लोगों की सुरक्षा के लिए कठोर नियामक प्रणाली बना सके। हम पहले भी ऐसा कर चुके हैं और आगे भी कर सकते हैं। उस प्रक्रिया में, बैंक या संचार व ऊर्जा कंपनियों जैसे कई निगम राष्ट्रीयकृत कर दिए जाएँगे, और उनका संचालन ऐसे नागरिक कर्मचारियों के प्रतिस्पर्धी स्टाफ द्वारा किया जाएगा जिनका पवित्र उद्देश ही सामान्य जन की भलाई होता है। अन्य निगम नागरिकों के नियंत्रण और स्वामित्व में सामूहिक रूप से स्थानीय स्तर पर संचालित होंगे। प्राचीन समय से ऐसे आदर्श शासन की मिसाल मिलती रही है और इसके लिए वैचारिक सजावट की आवश्यकता नहीं है।

  • एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो लोगों की और लोगों के लिए हो

       आर्थिक समानता और वित्त के विशुद्ध विनियमन के बिना प्रजातंत्र संभव नहीं है। जब हम सो रहे थे, एक धूर्त गुट ने दशकों तक गैरकानूनी और अनैतिक तरीकों से खूब धन बटोर लिया और उस एकत्रित पैसे को समुद्र पार संचित करके रख लिया। हमारे अधिकांश नागरिक तो इस भ्रष्टाचार की कल्पना भी नहीं कर सकते, जो उद्योग और सरकार के चमकदार मुखौटे की आड़ में सभी जगह फ़ैल चुका है।

       यह सभी बंद होगा। हम आतंरिक राजस्व सेवा और अन्य सरकारी ब्यूरो में ऐसे हजारों पेशेवर ऑडिटर्स को सशक्त बनाते हैं जो FBI की सहायता से आगे बढ़ेंगे और सुरक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेंस) सहित सभी सरकारी शाखाओं में बेधड़क सारी ऑडिट करेंगे। हम कांग्रेस और इसके सभी सदस्यों की सम्पूर्ण वित्तीय ऑडिट करने की माँग करेंगे। साथ ही पूरी कार्यकारी शाखा (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) और न्यायतंत्र के सभी मुख्य सदस्यों की भी ऑडिट की जाएगी। हम आग से भी नहीं डरेंगे, हजारों लोगों पर जुर्माना लगाएँगे और कारावास देंगे, या आवश्यक हुआ तो इससे भी बढ़कर।

       एक बार जब सरकार पुनः अपने माननीय नागरिकों के हितों के लिए समर्पित हो जाएगी तब हम निगमों और अति-धनाढ्य लोगों के लिए यह प्रक्रिया शुरू करेंगे।

       याद रखें कि जो लोग खराब धन में खेलते हैं, उन्होंने यह धन अवैध व्यापार प्रथाओं द्वारा पूँजी तक अनुचित पहुँच के माध्यम से कमाया है। उनकी संपत्ति को घटा दिया जाएगा ताकि वे इसका उपयोग पत्रकारिता, राजनीती या शिक्षा को कमजोर करने के लिए ना कर सकें। अब से वित्त एक अत्यधिक विनियमित क्षेत्र होगा जिसे मुख्य रूप से लोगों के प्रति जवाबदेह सरकारी संस्थाओं की निगरानी में रखा जाएगा।  क्षेत्रीय बैंक सहकारी समितियों का रूप लेंगे जिनका संचालन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नागरिकों द्वारा किया जाता है। गैर-जवाबदेह बहुराष्ट्रीय बैंकों के जोखिम से नागरिकों को बचाने के लिए किसी भी डिजिटल मुद्रा को अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • सच्ची शिक्षा और खोजी पत्रकारिता को सहयोग दें

       राजनीती किसी भी मतलब की नहीं रह जाएगी यदि हमारे नागरिकों को अपने समाज के बारे में सूक्ष्मता से सोचने और उनकी कल्पनाओं की अनंत क्षमता का भरपूर उपयोग करने के लिए जरूरी अच्छी शिक्षा ना मिल सके। नागरिकों को कम उम्र से ही इतिहास और साहित्य, दर्शन और विज्ञान पढ़ना चाहिए ताकि वे हमारी उम्र की जटिल समस्याओं को समझ सकें।

       हम एक नई शिक्षण प्रणाली बनाएँगे जिसमें सभी नागरिकों के साथ समान बर्ताव होगा। स्कूलों के फंड को कभी भी स्थानीय रियल एस्टेट टैक्स से नहीं जोड़ा जाएगा। शिक्षकों को समाज के अन्य सदस्यों की तरह ही पुरस्कृत किया जाएगा। सभी को अच्छी शिक्षा प्रदान की जाएगी क्योंकि हम प्रत्येक को एक सक्रिय नागरिक के रूप में देखना चाहते हैं।

       पत्रकारिता शिक्षा का ही एक विस्तार है, इसलिए इसे नागरिकों को असली मुद्दों से अवगत कराना चाहिए, ना कि सनसनीखेज घटनाओं से, और इसे लोगों को सिखाना चाहिए कि वस्तुओं को ऊपरी रूप में ही ना देखकर आर्थिक व सांस्कृतिक वास्तविकता पर देखना चाहिए।

       दुखद रूप से, पत्रकारिता एक ऐसे लज्जाजनक कीचड़ का रूप ले चुकी है जो विकृत चित्रों और दिखावटी बातों, निराधार चीजों से अख़बारों, टीवी प्रसारणों और इन्टरनेट पोस्ट्स को भरने का काम कर रही है, जो हमारे निकृष्ट देवदूतों को आकर्षित करते हैं।

       जबकि नागरिकों को निष्पक्ष तरीके से सोचना और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए साथ मिलकर काम करना सीखना चाहिए, उनके अन्दर बल्कि यौन इच्छा भड़काई जा रही है या निरर्थक कार्य की ओर बढ़ने को प्रेरित किया जा रहा है।   

       सरकार को स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष मीडिया का साथ देना चाहिए जो सत्य के प्रति समर्पित हो और जो नागरिकों को स्वयं सोचने को प्रोत्साहित करता हो। हाल के गंभीर मुद्दों को लेकर खोजी पत्रकारिता, साहसी पत्रकारिता को एक बार वापस व्यावहारिक कैरियर बन जाना चाहिए।

       कला हमारे नागरिकों के जीवन का हिस्सा होनी चाहिए, वह चाहे पेंटिंग हो, मूर्तिकला हो, डिजाइन, नाटक, संगीत या साहित्य हो। सरकार को इन सबको बढ़ावा देना चाहिए ताकि नागरिकों में अपने आपको अभिव्यक्त करने को लेकर आत्मविश्वास जग सके और वे स्वयं अपने भविष्य को देखने की दृष्टि पा सकें। नागरिकों को निगमित मीडिया द्वारा तैयार चमकदार चित्रों या चिकनी बातों पर भरोसा करने को विवश नहीं किया जाना चाहिए।

       कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देकर युवाओं को आज की तुच्छ और विकृत संस्कृति से बाहर निकाला जा सकता है, वह जो उन्हें छोटे-छोटे सुख की तरह धकेल रही है और समाज के प्रति समर्पित होने की उनकी क्षमता को लूट रही है। उन्हें स्वयं उनकी अपनी फिल्म, उनके अपने समाचारपत्र और उनकी अपनी पेंटिंग व फोटो बनाने का अवसर प्रदान करके उनके अन्दर समाज को बदलने का आत्मविश्वास जगाया जा सकता है, जबकि उनके काम के लिए उन्हें उचित वेतन भी दिया जाए।

  • 13वें संशोधन की माँग है कि दासत्व समाप्त किया जाए

हमारे संविधान का 13वाँ  संशोधन स्पष्ट रूप से दासत्व पर रोक लगाता है। फिर भी हमारे कई नागरिक बैंकों की दूषित प्रथाओं के कारण कर्ज में डूबे हुए हैं, जो कारगर दासों की तरह कारखानों और स्टोर्स में काम करते हैं। हमारे कई नागरिक झूठे आरोपों के कारण कारागार में बिना वेतन काम करने को मजबूर हैं या अपने प्रियजनों को देखने तक को तरस रहे हैं। ये सभी अपराध निगमों के फायदे के लिए हैं।

       ये घिनौने कृत्य 13वें संशोधन के दृढ़ता से लागू होने पर बिना किसी आपत्ति के बंद होंगे।

       अमेरिकी कर्मचारियों के साथ उन बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा अपमानजनक बर्ताव किया जाता है  जो अमेरिकी होने का ढोंग करती हैं। यहाँ तक कि उन निगमों द्वारा पुलिस, सैनिक और स्थानीय एवं संघीय संस्थाओं व व्यवसायों के कर्मचारियों के साथ भी गुलामों की तरह अपमानजनक बर्ताव किया जाता है जो 13वें संशोधन की घोर अवहेलना करते हुए इनको मूल आय के लिए भी निर्भर बनाकर रख देना चाहते हैं।

  1. व्यापार पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) और एकदम मुफ्त होना चाहिए

       व्यापार दुनिया भर में समुदायों के बीच अदल-बदल का एक सुनहरा अवसर हो सकता है। लेकिन व्यापार, जैसा कि आजकल प्रचलन में है, हमारे अनमोल इकोसिस्टम और लोगों को नुकसान पहुँचा रहा है। व्यापार का मतलब केवल विशालकाय जहाजों से है, जो निवेश बैंकों के नियंत्रण में हैं, जो समुद्र मार्ग से सामान ले जाते समय भारी धुआं छोड़ते हैं और केवल कुछ लोगों के फायदे के लिए काम करते हैं, ना कि उन लोगों के लिए जो सामान बनाते हैं, ना ही उनके लिए जो उनका उपयोग करते हैं।

       यह पृथ्वीवासियों के लिए लाभदायक नहीं है, और “व्यापार” के नाम पर नुकसान भुगत रहे स्थानीय उद्योगों और खेतों के लिए, और बिना इच्छा के आयातित माल खरीदने को मजबूर नागरिकों के लिए निश्चित रूप से यह “अंतर्राष्ट्रीयकरण” भी नहीं है, यह निवेश बैंकों और सट्टेबाजों के द्वारा नियोजित है। हमें साथ मिलकर इसपर पूरी तरह पुनर्विचार करना चाहिए कि वास्तव में व्यापार कहते किसे हैं और 100% जीवाश्म ईंधन मुक्त व्यापार व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए जो हर किसी के लिए उपलब्ध हो और जो स्थानीय समुदायों की जरूरतों का आदर करता हो।

  1. नैतिक पतन इस राजनैतिक संकट के मूल में बसता है

       वर्तमान संकट सबसे ऊपर आध्यात्मिक संकट है। जब हम सो रहे थे, हमारा देश पतन और संकीर्णता की गहराईयों में चला गया। सभ्यता का यह रोग उनको भी लग गया जिनकी भावनाएं उत्तम थीं। विनम्रता, मितव्ययिता और अखंडता हमारे शब्दकोष से मिट चुके हैं। मूल्यों और चरित्र का अदृश्य आतंरिक विश्व जो नागरिकों की नैतिक तर्कशक्ति का आधार होना चाहिए था, उसकी जगह एक ऐसे प्रदर्शन ने ले ली है जो नागरिकों को गन्दगी का एक निष्क्रिय ग्राहक बना देता है।

       जब तक हम अपने कार्यों को स्वयं नियंत्रित नहीं कर सकते हों, ऐसे समुदाय नहीं बना सकते जो सच्चाई की माँग करते हों, जब तक हम अपने पड़ोसियों पर भरोसा ना कर सकते हों, अपने बच्चों से दिल खोलकर बात नहीं कर सकते हों और सामान्य मूल्यों को ऊँचा नहीं उठा सकते हों, तब तक हमारे देश पर कब्जा किए बैठी शक्तियों के सामने खड़े रहने में हम असमर्थ ही रहेंगे।

  1. सैन्य खुफिया भवन को बदलना

       अनियंत्रित सेना के कारण ज्यादा कीमत पर हथियार बेचकर निगम हमारे टैक्स डॉलर्स को ले जाते हैं और सीधे अपने बैंक अकाउंट में स्थानांतरित कर देते हैं, उन हथियारों की फिर समीक्षा भी नहीं होती, या वैज्ञानिक परीक्षण भी नहीं होता।

       हमें ऐसे पुरुषों और महिलाओं की जरूरत है जो अपने देश के लिए जान देना चाहते हों। दुखद रूप से उन पवित्र भावनाओं को कुटिल तरीके से गलत निर्देशित किया जा रहा है। सेना, और उसे पेनम्ब्रा की तरह घेरे हुए खुफिया “समुदाय” को बदलना चाहिए, और सर्वोपरि, वह मौसम के बदलाव का शमन करने, और उसे अनुकूलित करने, और बायो-फासिज्म जैसे अन्य वास्तविक सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए समर्पित होनी चाहिए।

       जीवाश्म ईंधन जैसे राक्षस, और उसके अनुचर जो हमरे देश पर राज कर रहे हैं, इनका अन्त करने और हमारी अर्थव्यवस्था को बदलने के खतरनाक काम को अंजाम देने में ही हमारे जवानों की बहादुरी है।

       जवानों! अगर आप इन ऊर्जा जारों के विरुद्ध खड़े नहीं हो सकते तो आप अपने आपको कैसे बहादुर कह सकते हो?

       “हमारी शांति और समृद्धि को उलझाना” के खतरों से सम्बन्धित जॉर्ज वॉशिंग्टन की चेतावनी के उल्लंघन के रूप में हम अनेक गुप्त संधियों की तरफ दौड़ चुके हैं जिन्हें संयोग से “इंटेलिजेंस शेयरिंग” और “सुरक्षा सहयोग” का नाम दिया गया है, जो हमें 1914 की जैसी तबाही की तरफ ले जा रही हैं। उस समय, ऐसी गुप्त संधियों के कारण एक भीषण दूरगामी प्रभाव पड़ा जो विश्व को एक भयंकर युद्ध की तरफ ले गया।

       आपमें से जो भी NSA के लिए कम भुगतान पर नौकरी कर रहे हैं, आपमें से जिन्होंने भी हमारी अनगिनत ईमेल को पढ़ा हो, या अफगानिस्तान के खतरनाक पर्वतीय रास्तों में भ्रमण करते हैं, आपमें से जिनको भी बड़े निगमों के आदेश पर बेकार चीजों द्वारा सामान्य लोगों को परेशान करना पड़ रहा हो, मेरी बात सुनें! मैं आपसे सच कहता हूँ, “मेरा साथ दें! आपके पास आपकी जंजीरों के अलावा खोने को और कुछ नहीं है।”

  1. हमारे नागरिकों पर तकनीक का खतरनाक प्रभाव डालना बंद करें

       मीडिया तकनीक के क्रांतिपूर्ण तरीके से बढ़ने को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर रहा है। अभी तक, अधिकतर, ऐसी नई तकनीकों को अपनाकर हमने अपनी ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता को गँवाया है, स्वयं के बारे में सोचने के साधनों से वंचित किया है, और बतौर नागरिक कार्य करने के लिए जरूरी जागरूकता से दूर किया है। तकनीक का उपयोग करके हमारे अन्दर छोटी-अवधि की उत्तेजना पैदा की जा रही है जो फिर लत बन जाती है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निगमों को लाभ पहुँचाते हैं, लेकिन वे इस संकट की गंभीरता से अनजान नागरिकों को उसमें डाल देते हैं।

       हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए, और हमें ऐसी नौकरी की जरूरत है जिसमें एक-दूसरे की सहायता की जा सके। लेकिन हमारा सामना होता है, बस रिकार्डेड मैसेजों से, स्वचालित चेकआउट से और उन सुपर-कंप्यूटर्स की लम्बी लाइनों से जो आराम से निगमों के लाभ की गणना करते रहते हैं। इस डिजिटल रेगिस्तान में हम बिल्कुल अकेले हैं। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि एक सोचा-समझा अपराध है।

       हमें गंभीर रूप से समीक्षा करनी चाहिए कि तकनीक का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इससे पहले कि हम उसे अमल में लाएँ। तकनीक बेहद मददगार हो सकती है, लेकिन सिर्फ तभी जब उसका उपयोग हमारी उम्र की वास्तविक चुनौतियों का हल निकालने के लिए किया जाए, ना कि हमें बदलने के लिए।

       हमारी पृथ्वी और हमारे समाज की स्थिति को वैज्ञानिक रूप से समझना ही हमेशा हमारा लक्ष्य होना चाहिए। हम विज्ञान और तकनीक में अंतर करने में भ्रमित हो जाते हैं। जैसा कि पॉल गुडमैन ने लिखा है, “भले ही यह नई वैज्ञानिक शोध मानी जाए या नहीं, तकनीक नैतिक दर्शन की एक शाखा है, विज्ञान की नहीं।”

  1. गैरबौद्धिक अभियान को रोकें जो हमें चुप करने के लिए है

       हमारे नागरिक उन असीमित अभियानों से घिर गए हैं जो गैर-बौद्धिक भावनाओं को बढ़ावा देते हैं और जो विश्व के बारे में गहराई से सोचने के प्रति हतोत्साहित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप हमारी संस्कृति में जो बदलाव आ रहा है वह स्वाभाविक नहीं है, बल्कि यह उन छिपी हुई ताकतों द्वारा लाया हुआ है जो हमें विनम्र बनाना चाहती हैं।

       हमें हमारे देश के हर कोने में बौद्धिक संलग्नता का स्तर बढ़ाना चाहिए, और लोगों को उनके बारे में सोचने, और स्वयं समाधान बताने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पढ़ना, लिखना और बहस करना इस प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण हैं और इनके लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

       नागरिकों को हस्तियों द्वारा प्रस्तावित सरल और शुष्क राय पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

       हम विज्ञापन के जहरीले जंगल व जनसंपर्क कंपनी को नागरिकता को बेजुबान करने और सबसे बढ़कर स्वार्थ के इस कपटपूर्ण पंथ को लादने की अनुमति नहीं दे सकते। जो नुकसान वे अभी तक कर चुके हैं उतना ही काफी भयावह है। एक साधारण बंजर भूमि ने सारे टीवी चैनल, सारे मॉल और सारे ऑफिसों पर कब्जा जमा लिया है।

       विज्ञापन और PR उद्योग को कठोरतम विनियमों का पालन करना चाहिए ताकि हमारे नागरिकों को मीडिया में वो चित्र दिखाए जाएँ जो बौद्धिक संलग्नता को बढ़ावा देते हों और एक स्वस्थ समुदाय की तरफ ले जाते हों। नागरिकों को ऐसे लेख (आर्टिकल) पढ़ने, और प्रसारण देखने का अधिकार है जो हमारे जीवन की सच्चाई को वैज्ञानिक तरीके से बताते हों, और उन कार्यक्रमों से बचने का भी अधिकार है जो अमीरों के विलासी जीवन के दृश्यों को नमूने के तौर पर प्रस्तुत करते हों।

  1. सात पीढ़ियों के Iroquois सिद्धांत को पूर्वरूप में लाएँ; विकास और उपभोग के पंथ को खत्म करें

हालाँकि, Iroquois राष्ट्र के संविधान का संयुक्त राज्य संविधान पर काफी गहरा प्रभाव रहा, स्थिरता पर इसका ध्यान हमारे संस्थापक पूर्वजों द्वारा दुखद रूप से अनदेखा किया गया। Iroquois और अन्य मूल राष्ट्रों की परम्पराओं को कभी भुलाना नहीं चाहिए। Iroquois राष्ट्र का “सातवीं पीढ़ी” का सिद्धांत माँग करता है कि हम इसपर विचार करें कि आज के हमारे निर्णय आने वाली सात पीढ़ियों के हमारे वंशजों के जीवन को कैसे प्रभावित करेंगे। यह सिद्धांत वैज्ञानिक और तर्कसंगत है, और यह इस धारणा का विरोध करता है कि महासागर, जंगल और घास के मैदान ऐसे सामान हैं जो व्यक्तिगत हैं या निगमों के अधिकार में हैं, और व्यक्तिगत लाभ के लिए उन्हें नष्ट किया जा सकता है।

       इस “सातवीं पीढ़ी” सिद्धांत को संविधान में संशोधन के रूप में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि यह हमारी आर्थिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्पूर्ण पुनर्मूल्यांकन कर सके।

       हमें राष्ट्र के कल्याण का आकलन करने के लिए “विकास” और “उपभोग” जैसे भ्रामक शब्द काम में लेना बंद कर देना चाहिए। हमें हमारे सभी नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण के हित और जंगली जानवरों व वनस्पति की समृद्धि के विषय में समग्र रूप से विचार करना चाहिए।

       हमारी उत्तरजीविता के लिए साथ मिलकर काम करना आवश्यक है। हम केवल धन-राशि (बजट) द्वारा समस्याओं को नहीं सुलझा सकते यदि बजट केवल पैसे पर निर्भरता को ही बढ़ावा देते हों। हमें नागरिकों के बीच वस्तु-विनिमय प्रणाली बनानी चाहिए ताकि पास-पड़ोसी एक दूसरे की मदद कर सकें और परस्पर सहायता के कार्यक्रम तैयार कर सकें जिससे परिवार और समुदाय आत्मनिर्भर बन सकें।

       स्वास्थ्य केवल सरकार द्वारा एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसे स्थानांतरित करके नहीं प्रदान किया जा सकता। हमें नागरिकों को भी एक-दूसरे की देखभाल करने, दवाइयों के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त करने, जड़ी-बूटी से उपचार करने और उचित व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना होगा ताकि कई बीमारियों का इलाज वे स्वतः ही बिना पैसे के कर सकें।

  1. लोगों के लिए खेती और एक स्वस्थ निष्पक्ष खाद्य अर्थव्यवस्था

       ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में जो तेजी से वृद्धि हो रही है इससे आने वाले दशक में भोजन की कीमत में घातीय रूप से वृद्धि हो जाएगी और खेती करना उत्तरजीविता के लिए सबसे जटिल कार्य हो जाएगा। हमने अभी तक इस तबाही से बचने का उपाय सोचना भी शुरू नहीं किया है।

       हमें इस औद्योगिक खेती की दिवालिया प्रणाली को पीछे छोड़कर अब ऐसी खेती की तरफ लौटना चाहिए जो लोगों द्वारा लोगों के लिए हुआ करती थी। जमीन को कई सारे नागरिकों में बाँट देना चाहिए जो उसका उपयोग पारिवारिक खेतों के रूप में कर सकें। इसमें विलाप या निंदा करने जैसा कुछ नहीं है। धरती माँ द्वारा दिए गए जल और मिट्टी कभी भी निगमों की संपत्ति नहीं थे, और ना ही कभी होंगे।

       कृषि के लिए सम्पूर्ण आवंटन प्रणाली विनियमित होनी चाहिए और इस तरह निष्पक्ष भी। बजाय इसके कि कुछ लोग कृषि निर्यात द्वारा अपना भाग्य चमकाएँ, यह कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि भोजन का उत्पादन इस तरह से हो कि हमारी मिट्टी और पानी को नुकसान ना पहुँचे। अमेरिकी लोगों को टिकाऊ जैविक खेती को अंगीकार करना चाहिए, बल्कि अभी करना चाहिए।

  1. संविधान में ना तो रिपब्लिकन ना ही डेमोक्रेटिक पार्टी का उल्लेख है

       दोषारोपण के थ्री-रिंग सर्कस ने यह हमारे सामने ला दिया है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था को संविधान से कोई मतलब नहीं है। शासन मृत है और राजनीती कॉर्पोरेट लॉबिस्टों, निवेश बैंकरों, मीडिया पंडितों और अमीरों के बीच विवादों में सिमट कर रह गई है, जिनकी वे सेवा करते हैं। मीडिया तो बहुत पहले ही पत्रकारिता की अखंडता को छोड़ चुका है और शराबी भीड़ की तरह बस पहलवानों पर अंडे फेंकने का कम कर रहा है।

       नीति बनाने और उसके लागू करने से जुड़े सारे विवाद संविधान में वर्णित सरकारी कार्यालयों में पारदर्शी तरीके से सुलझाये जाने चाहिए।

       आज भी, नीति निगमों द्वारा बनाई जाती है, या विवादों पर चर्चा अपारदर्शी और गैर-जिम्मेदार राजनैतिक पार्टियों द्वारा की जाती है, वो भी स्पष्ट रूप से असंवैधानिक तरीके से। धोखे में ना रहें। संविधान में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का उल्लेख ही नहीं है और वे हमारे नागरिकों के अधिकांश बहुमत का प्रतिनिधित्व भी नहीं करतीं।

       नीति से सम्बन्धित निर्णय उन पार्टियों पर छोड़ देना जो संविधान द्वारा विनियमित ही नहीं हैं, एक अपराध भी है और असंवैधानिक भी, और इसे बंद किया जाना चाहिए।

       राजनैतिक पार्टियाँ नागरिकों के लिए स्थानीय स्तर पर मिलने और विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए एक उपयुक्त स्थान हैं। संविधान डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों को नीति बनाने या उनपर शासन करने का कोई अधिकार नहीं देता। शासन जिम्मेदार सरकारी संस्थाओं द्वारा बिना किसी निगमित राशि के पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।

  1. मास्क और टीकाकरण व्यवस्था को बंद किया जाए

       वो अति धनाढ्य लोग, जो भ्रष्ट सरकारी कार्यालयों के पीछे छुपे हुए हैं, बेकार NGO और विभिन्न पतनशील हस्तियाँ, हम लोगों को एक-दूसरे से दूर करने और एकत्रित होने की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को नष्ट करने के लिए मास्क व्यवस्था और लॉकडाउन नीति की ओर धकेल रहे हैं।

       विज्ञान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मास्क स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रहे हैं और अत्याचार का एक जबरदस्त तरीका हैं। लॉकडाउन को लेकर भी यही बात लागू होती है।

       अमीर लोग अपने स्टॉक होल्डिंग का उपयोग करके मीडिया दिग्गजों से माँग करते हैं कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लॉकडाउन और टीकाकरण के समाचारों का ढोल बजा दिया जाए।

       उन्होंने विशेषज्ञों को रिश्वत देकर उस टीकाकरण को तुरन्त प्रभाव में लाने के लिए तर्क देने को कहा है जिसका परीक्षण जानवरों पर भी नहीं किया गया है, कानूनी दायित्वों से जो मुक्त है और जिसे गोपनीय तरीके से तैयार किया गया है। उन टीकों में संशोधित RNA है जिससे कैंसर, अल्जाइमर, पार्किन्सन जैसी गंभीर व अन्य पीड़ादायक बीमारियाँ होंगी। ये टीके बिल्कुल नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा व बचाव के सेकरीन सिरप का चोगा पहने हुए लोगों के बीच युद्ध की एक घोषणा हैं।

       इस गैरकानूनी टीका व्यवस्था के तहत हर किसी के अन्दर उन रसायनों को डाला जाएगा जो बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा गोपनीय तरीके से तैयार किए गए हैं और फिर उन वैश्विक व राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा स्वीकृत कराये गए हैं जो उनके नियंत्रण में हैं। वैज्ञानिकों और नागरिकों को संविधान के उल्लंघन में इस नीतिगत बहस से बाहर रखा गया है।

       लगातार निगरानी, पैसे को बहुराष्ट्रीय बैंकों द्वारा नियंत्रित डिजिटल मुद्राओं से बदलने, और सभी लघु व्यवसायों को नष्ट करने के लिए इस संकट का फायदा उठाया जा रहा है। जो भोजन हमें खाना चाहिए वह भी बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा नियंत्रित होता है, जो दवा हमें इलाज के लिए लेनी चाहिए वह दवा कंपनियों द्वारा नियंत्रित होती है, विश्व को समझने के लिए जिस शिक्षा की हमें जरूरत है और जानकारी प्राप्त करने के लिए जिस पत्रकारिता की हमें जरूरत है वह निवेश बैंकों और बहु-अरबपतियों द्वारा नियंत्रित होती है।

My Proposal to the Citizens of the United States of America

My Proposal to the Citizens of the United States of America

My Proposal to the Citizens of the United States of America at this dangerous moment

Emanuel Pastreich

As the only candidate in the presidential election who addressed the criminal conspiracies of 9.11, of the theft of trillions of dollars from the Federal Reserve in 2020, and the COVID19 bogus pandemic, the only one who refused all funding from the rich and powerful and who worked with ordinary Americans for the common good, for truth and morality, I feel that I am best positioned to serve as president of a provisional government of the United States of America, only until such time as the rule of law is restored and we can govern the nation in accord with the Constitution.

I propose only that I can serve as an acting president for the moment as we collect together the best and the brightest to set out, and act upon, a plan to rebuild the United States spiritually and intellectually and to restore the republic and discard the empire of finance and entertainment, of war and extraction, that we have been drawn into.

My loyalty is to the Constitution of the United States exclusively. I have no interest in the worship of personalities, whether it be Alexandria Ocasio-Cortez or Donald Trump, Noam Chomsky or Glenn Beck. Although all of them occasionally speak the truth, they have all been reduced to puppets in the show over the last year.

I welcome you, I welcome everyone with a clear mind and a decent heart, to join me.

I solemnly warn those with ill intentions, those who work secretly for the super-rich, that we will not tolerate your games any more.

If no one else steps forth to take this position of leadership, I will have no choice, out of my love for our Constitution and for our republic, but to chart out a path forward towards freedom, liberty, sustainability and survival in this most hellish moment of human history.

My record is clear for all to see. For the last twenty years of the battle against totalitarianism, I have adhered to the principles of Cincinnatus. Like Cincinnatus, I have always been ready to return to my humble position as educator when a crisis has passed. I have a proven record of willingness to forgo all power and authority and to pursue the common interest even at great personal sacrifice.

For all intents and purposes, the “provisional government,” is effective immediately.

I promise, in accord with the Constitution and the Declaration of Independence, to serve only temporarily as president of the United States of America in this crisis, not as a usurper, or as an imposter or a pretender, but rather in the sense that Cincinnatus rose up to play a role in governance during a crisis in ancient Rome. Cincinnatus made it clear he had no greater ambitions and he quietly retired to his farm when his role was completed.  

I will have the humility and the flexibility, to accept suggestions from all corners and to refuse to have anything to do with the corrupt media, the corrupt political parties or the super-rich who believe that they rule the Earth.

In the following days, we will put forth a series of emergency orders to re-establish the efficacy of the Constitution and the rule of law in the United States. 

We will also, with your help, put for forth a plan for a true reform of the United Nations as well that will make it a fit vessel for ethical governance for the Earth that is not influenced by corporations, investment banks, or the rich who lurk behind them.

I have the authority to take these steps only in that I am granted that authority by the citizens of the United States in accord with the Constitution. If I am granted that authority, just for the duration of this crisis, just for the period of time required to establish a functional and constitutional government, then that authority that I will hold will be far greater than any authority granted by commercial journalism that prays before the false gods of finance, granted by the politicians that are fed like lap logs by their rich masters, or granted by the hyenas and jackals that run contracting companies for defense, security and manufacturing and roam the dismal wasteland surrounding the Capitol.

Thank you for listening to me. I will go forward, with your support, to follow the Constitution and to protect the true interests of our citizens, not multinational investment banks and the rich who control them. I will do so to the best of my ability, so help me God. 

Why we need a Provisional Government of the United States

Why we need a Provisional Government of the United States

Why do we need a provisional government for the United States of America?

An unavoidable response to the current crisis of governance

Emanuel Pastreich

The mainstream media in the United States is now controlled by the super-rich through a web of holding companies and privatize intelligence firms dedicated to domestic propaganda. The news, once meant to inform citizens in accord with the Constitution, now keeps repeating, hypnotically, that America is returning to normal under the Biden administration. Yet, it is clear to the most casual observer that hidden forces are implementing an unprecedented totalitarian governance at all levels in the United States, and globally.

Before the opinions of presidents and Harvard professors, before the insights of intelligence and military experts, before the comments of billionaires and technology kings, the authority of the first amendment of the Constitution is paramount.

“Congress shall make no law abridging the freedom of speech, or of the press; or the right of the people peaceably to assemble, and to petition the Government for a redress of grievances.”

Congress has passed laws, and passed secret laws, that abridge freedom of speech, crush freedom of the press, prohibit peaceful assembly, and that end the right to petition the government. The executive and the judicial have conspired to enact, and to maintain, criminal administrative structures. More importantly, the rich and powerful are planning to enact even more repressive criminal administrative structures in the near future.

The Atlantic Council released a chilling report entitled “Domestic violent extremism and the intelligence challenge” that describes the January “storming of the Capitol Building” by clowns and buffoons as a “failure of intelligence” and demands the creation of a Domestic Violent Extremism Unit (DVEAU) under the National Counterterrorism Center (NCTC) that reports to the Director of National Intelligence.

The author, Mitchell D. Silber, offers us terrifying new terms like “domestic violent extremism” (DVE) and “racial or ethnically motivated violence” (REMV) that will be used this year not only to justify juicy budgets but also to permit the oppression of all domestic opposition by intelligence agencies that are by their nature opaque, unaccountable and free to do as they please without any disclosure to local police or to the judiciary.

 

American citizens will be designated as terrorists by a shadow government that hears only its master’s voice. Those secret powers can toy with us for sport as wanton boys would do with flies.

 

No! We cannot wait any longer. We cannot complain over coffee, or organize desultory protests on weekends when the gaudy false gods permit us.

 

No! We must establish our own legitimate provisional government granted authority by the Constitution to administer the United States until such time as the Constitution is restored, and the rich and powerful are put in their place.

 

The government has collapsed into such anomy that we have no choice but question the legal authority of those who pretend to be a government and to propose a constitutional and moral alternative.

 

As Thomas Jefferson declared, “The tree of liberty must be refreshed from time to time with the blood of patriots and tyrants.”

 

What do we do now?

The Founding Fathers describe clearly what our response should be to such a crisis in the Declaration of Independence.

That Declaration of Independence, in turn, is the foundation on which the Constitution stands, and the Constitution, in turn, forms the skeleton that supports all legitimate governance in the United States of America.

If the government operates outside of the Constitution, it is not the government any more, but rather a criminal enterprise masquerading as a government. This critical distinction must inform our every step from this day forward.

The Declaration of Independence is unambiguous:

“When a long train of abuses and usurpations, pursuing invariably the same Object evinces a design to reduce the citizens under absolute Despotism, it is the citizens’ right, it is their duty, to throw off such Government, and to provide new Guards for their future security.”

We face today precisely such an “absolute despotism” and we must take action in a coordinated manner to establish a functional government, to “provide new guards” for our children and our grandchildren.

The shadow government that makes the real decisions, long before those politicians are dispatched to appear on television, is trying, right now, to lull us to sleep, to convince us that everything is returning to normal, so that they can launch their final campaign for the complete subjection of all Americans and, with us, all the citizens of the Earth.

That shadow government, that “absolute despotism” of the super-rich, baffles us with a confusing tapestry of arguments about policy, cynically induces emotional responses in us to the personalities of politicians, and to images associated with political parties.

There is no search for truth and there is no commitment to moral governance anywhere in this wasteland.

These cynical operators are following carefully scientific studies on mental manipulation, on the rape of the mind, and on techniques for mass hypnosis conducted in secret by government and by corporations over the last sixty years. They create an imbricated web of arguments and images, but they have one unifying purpose: To distract and to confuse the citizens of our Republic so that few can grasp this unconstitutional seizure of power until it is too late.

They repeat the same hypnotic messages to prepare us for tyranny. They sweeten the bitter medicine with flavors, conservative or progressive, libertarian or Christian, depending on the audience.

We are not in denial. We will not play these cynical political games. We will not abuse the trust of the public in authoritative institutions as a means to trick them into actions aimed at their enslavement, at their mental and physical destruction.

We have no higher masters than the scientific search for truth and the moral imperative for transparent and ethical government as described in our sacred Constitution.

Elections in the United States were problematic from the start. Those elections have been deeply compromised for the last twenty years and they are now irrevocably broken now. Not only is the counting of votes manipulated, and citizens regularly denied the right to vote, citizens are denied also access to accurate information concerning issues, policies and politicians by the gangrenous media. 

As a result, the government has been reduced to an appendage of the rich and powerful. It no longer represents us, or assists us, in our struggle to guarantee a transparent and accountable political process that attends to the needs of citizens.

They have burned the Constitution and they have buried the entire administrative process of the executive, the legislative and the judiciary in a shallow grave.

Before we talk about how we will govern the United States from this day forward, let us first address the status of the best-known candidates for President Mr. Joseph Biden and Mr. Donald Trump.

Mr. Biden and Mr. Trump are two men caught up in a collapsing system of governance, in a decadent and narcissistic political culture. Many of the actions that they take, they take because they feel they are compelled to do so by greater powers.

We have no desire to blame them. We respect what they attempted and we recognize the hardships that they have suffered.

Mr. Biden is a prisoner in the Oval Office. He does not play a role in governance. Powerful multinational corporations, and the rich who hide behind them, dictate to him what his policies will be. He is trotted out before the camera like a show pony, a lame show pony.

Mr. Biden is a tired, sad old man.

Nevertheless, he has some responsibility for the rape of the Constitution and the pillage of government taking place today. He was aware of the corruption and the criminality in the last election and he chose to go along with the program in silence.

He must resign, along with his entire administration. There is no other choice at this point.

Mr. Trump has good reasons to claim that the presidential election was fixed. The protests by his supporters concerning the vote count in Arizona, Michigan, Wisconsin, Georgia and Pennsylvania deserve to be taken seriously. The dismissal of his arguments by the corporate media was dishonest.

Those facts, however, do not make Mr. Trump the legitimate president of the United States of America.

Mr. Trump accepted the support of the criminal syndicate known as the Republican Party, and the super-rich who hide behind it. He was unable, or unwilling, to back away from the vaccine regime, the drive for militarism, and the take-over of governance by multinational corporations working through their agents. He accepted an election that excluded all qualified candidates through illegal means and that banned meaningful journalism. There is evidence that the Republican Party, like the Democratic Party, also took illegal actions to restrict the vote. 

We recognize that Mr. Trump took a brave stand on several occasions during his term of office, but he is too compromised to play a role in accord with the Constitution of the United States of America.

Neither Mr. Trump nor Mr. Biden has addressed these three critical issues for the United States publically:

The criminal operation to create a false flag attack on the United States, known as the 9.11 incident, as a means of dragging the United States into foreign wars that would rip it apart.

The theft of 10 to 15 trillion dollars from the Federal Government between January and September of 2020 by multinational investment banks and other global players.

The promotion of a bogus “pandemic” known as COVID19 as a means to destroy freedom for citizens, to enact criminal lockdowns and quarantines, and to promote dangerous “vaccines” by multinational corporations employing the stolen authority of the Federal government.

Neither Donald Trump nor Joe Biden have condemned these criminal conspiracies that are self-evident to the casual observer.

That silence makes them coconspirators and disqualifies them both from serving as president. In fact, none of the registered candidates for president that I could find made any clear statements concerning these three issues and they are, therefore, also disqualified.

Finally, neither Mr. Biden nor Mr. Trump possess the temperament, the vision, or the bravery to lead us forward against the enemies, seen and unseen, who are tearing our country apart.

We have entered into uncharted waters in which sacrifice, bravery, leadership and the ability to create entirely new institutions for the benefit of the people, not to serve the rich, will be the primary task. These two men are incapable of rising to this demand.

The only appropriate response we can take in this case is to call for a new, internationally supervised, fair election.

It is impossible to do so now because the Federal Government is run by the criminal syndicates known as the Republican and Democratic Parties, and not by independent government institutions in accord with the Constitution.

The first step, before any elections can be held is to clean house and to upgrade.

We will set up a provisional government in the United States that can address directly, and forcibly, the three criminal conspiracies listed above, and others, and can lay the foundations for the restoration of governance in the United States.

Only then can a meaningful election be held. Only then can we drive out of Washington the super-rich who toy with government for their fun and profit.

It is a dangerous step to proclaim a provisional government, and the risks that this noble effort with be subverted or abused by the same monsters who have laid waste to Washington D.C. is real.

We have, sadly, no choice and no time.

Declaration of Establishment of Provisional Government of US

Declaration of Establishment of Provisional Government of US

DECLARATION OF THE ESTABLISHMENT OF A PROVISIONAL GOVERNMENT

FOR

THE UNITED STATES OF AMERICA

As grievous as was the blow, as terrible as is the suffering, as overwhelming and demoralizing as has been the ensuing chaos, and as discouraging as has been the spread of falsehoods, and the seduction of the educated, it is no surprise to the historian that a mighty nation like the United States could rapidly decline into moral depravity.

It is no mystery to the scholars of Babylon and Rome, of Byzantium and Athens, that great governments are brought to their knees, not by an external enemy, but rather by the substitution of superficial rituals for moral action, by a spiritual blindness that strikes down the best and the brightest.

This moral virus has infected the minds of those who should have known better, and the door was left ajar for the crafty and the cunning to surreptitiously sneak in and slip a collar around the eagle’s neck, rendering justice a pet for their idle amusement.

We have no time now for laments, standing here on the battlefield. The cruel powers have unleashed their dogs of war and they are ripping our institutions to shreds, tearing the living heart out of our government and our schools, and leaving behind our values and beliefs as rotted carcasses for the jackals to feed upon. These stealthy forces keep shifting their forms to confuse us, now conservative, now progressive, now black, now white.

What we know with certainty is that the current lull in the battle is the bait they have laid out for us. They are planning a final assault, as we stand here, dazed and confused. They want us to be absorbed in our selfish needs, stewed in the narcissism of the smartphone, lost in the cult of the self, and incapable of organizing our thoughts, or of mustering bravery, or of rising to the occasion.

Their weapons are different. Rather than a tank, they use a vaccine syringe for their first melee. They use AI and commercial media to reprogram our brains, rendering us docile beasts that chase after food, pornography and glittering images. We did not even notice how they made us dependent on them for food, for energy, for information, and now even for our very identity.   

Not a single column still stands in the temple of government that our founding fathers erected.

The beasts have carved the executive branch up into private fiefdoms, and leased them out to foreign banks. These days, those involved in governance are patted on the head and rewarded for tearing apart the edifice, for doing the bidding of the hidden masters.

The members of the Congress, regardless of their color or flavor, thrust their snouts deep in the public trough, where they devour the slop shoveled their way by the high priests of Mammon.

There are only two parties: the pimps and the whores.

The gangrene flowing through the veins of the judiciary is foul. It corrupts everything it touches, rendering judges and prosecutors unfeeling, incapable of, and unwilling to, uphold the Constitution, or to do anything that might displease their true masters.

Newspapers, magazines, universities and research institutes, corporations and foundations, are spigots that spew forth lies.

An evil spirit has possessed the public sector, rendering it a monstrosity. It slouches towards your neighborhood with a syringe in hand.

In light of the collapse of all branches of the Federal government, and the slip of civil society into the dark abyss of decadence and narcissism, we citizens declare that an Provisional Government of the United States of America is established hereby that will serve as a midwife in the painful, but promising, rebirth of this nation.

The words of this declaration limn the direction forward for our nation and suggest the contours of our future.

The provisional government of the United States will distinguish itself from the wreckage now occupied by jackals and hyenas, by its strict adherence to our sacred Constitution and to the spirit of the law.

The provisional government will administer as much of the United States as it can, granted the tremendous challenges that we face.

The roots of our government are planted firmly in hearts of patriots, of citizens committed to liberty, justice and freedom. The provisional government will lay the foundations for an accountable government capable of addressing common concerns about the economy, society and security, hand in hand with those patriots. 

The United States has a noble tradition of democratic governance. The inspiration for our nation, however, must be traced back to the American Revolution of 1776, and to the revolution against slavery of 1860. Our political philosophy is revolutionary, and this is a moment when that tradition must be revived.  

The Declaration of Independence was the first step, a break with the British Empire. This declaration of independence is a break with the insidious empire of finance and speculation run by billionaires and their servants.


We hereby declare our independence from that empire of corruption and pillage, that empire of foreign wars and manipulative media, that empire of processed foods and needless medications forced on us for profit.


Our founding fathers declared, 

“We hold these truths to be self-evident, that all men are created equal, that they are endowed by their Creator with certain unalienable Rights, that among these are Life, Liberty and the pursuit of Happiness.–That to secure these rights, Governments are instituted among Men, deriving their just powers from the consent of the governed. But when a long train of abuses and usurpations, pursuing invariably the same Object evinces a design to reduce them under absolute Despotism, it is their right, it is their duty, to throw off such Government, and to provide new Guards for their future security.”

We will provide precisely the “new guards” for the future security of our children, and our grandchildren. We do so through the formal establishment of a provisional government of the United States to oversee the rebuilding of the Republic and the rebuilding of a constitutional democracy in our beloved nation.

First steps for reform of the US Provisional Government

First Steps for Change

of

The Provisional Government

for

The United States of America


We do not need any more media-savvy swiveling between the fraudulent flavors of “progressive” and “conservative,” the Pepsi and Coke of debased politics.

Before we recognize anyone as president, we must first establish a Provisional Government for the United States of America in accord with the Constitution.

That provisional government will devote its efforts to reestablishing a republic and a democracy based on the Constitution.

That effort can only be successful if we take the following six steps:  




1)

We will list the billionaires, investment banks, private equity funds and the other parasitic financial institutions that have taken control of our nation’s government and detail how they govern us illegally.

We will make all information public regarding their criminal takeover, and their criminal administration, of our country. We will bring criminal charges against the leaders, and seize their assets, regardless of how many politicians they own, or how many billions of dollars they claim to possess.


2)

We will take control of the economy, starting with money and finance (especially the Federal Reserve), and create an economy of the people, by the people and for the people.

The speculative economy will end and all fiscal policy will be drafted in close coordination with citizens using scientific data concerning the true short-term and long-term challenges facing our nation. For-profit organizations will play no role in the formulation of economic policy, nor will foreign economic concerns. Corporations whose stock is owned by foreign interests, that have their headquarters outside of the United States, will not be considered American.

3)

We will establish true journalism, starting with journalism produced by networks of patriotic citizens, that is dedicated to the pursuit of truth, and does not shy away from taboo subjects. This journalism will have no corporate sponsors and will be accompanied by social media networks and search engines that are run as regional and national cooperatives responsible to the people, that have pursuit of truth, not profit, as their paramount goal.


4)

We will establish an international committee of ethical citizens to oversee an investigation of the criminal actions by those pretending to be the United States government for the last twenty years. Base on the findings of those public investigations, we will make proposals for a revolutionary restructuring of the government so as to make the citizen again sovereign.

Only then will we be able to hold transparent and accountable elections for the President and the Congress that allow the citizens to vote on the basis of accurate information, elections from which corporate money and private wealth will be banned.

Criminal syndicates like the Democratic Party and the Republican Party, not described in the Constitution, will play no role in these open and fair elections.    

5)

We will set down national security priorities related to the threats facing our citizens. The process of assessing those security concerns will be immune from the lobbying of weapons manufactures and investment banks. We will consider crucial issues such as the collapse of biodiversity, the destruction of our climate, the concentration of wealth and the misuse of technology to destroy the minds of our citizens. We will also stop the use of automation and communications technology by corporations to destroy our livelihoods. We see the war of the rich against the citizens of the Earth as the primary security threat of our age.

6)

We will reform the United Nations so that it will become a space for true “Earth” governance that takes an internationalist perspective, and is not a tool for globalism. We will banish from the United Nations the money chargers and the plutocracy who have shredded the United Nations Charter and made its employees into their lapdogs.


 
The demands are simple, but achieving them will require vision, inspiration, tenacity and sacrifice. The rebuilding of the United States, in accord with its sacred Constitution, will be both a national and an international project.

We call out to all Americans, to all patriots who can hear our voices, and especially to those who were lucky enough to receive outstanding educations, privileged enough to obtain specialized training in the sciences, in international relations, in economics and in medicine. It must be you! Lawyers, doctors, professors, technicians, government officials, corporate executives and business owners! This is your moment of truth.

This is the moment when you must choose to stand with the downtrodden, choose to help citizens, who have not been so fortunate as you have, to distinguish truth from falsehood.

Those who possess extreme riches are not your friends. They care no more for you than they do for the homeless.

We declare today that in our streets, in our neighborhoods, in our states and in our nation, the United States of America, the super-rich and their minions shall have no dominion. The government titles or institutional trappings that they have stolen, or bought, grant them no authority over us.

If truth slips from our grasp, the powerful can easily twist our sentiments. The evil that they stir up shifts patterns, so as to blend into any scene, like a moth, like a chameleon. 

Our provisional government will adhere to the constitution, to the sacred truth and to our moral indignation. We know no other masters.   

First Steps for Provisional Government of United States

First Steps for Provisional Government of United States

First Steps for Change

of

The Provisional Government

for

The United States of America


We do not need any more media-savvy swiveling between the fraudulent flavors of “progressive” and “conservative,” the Pepsi and Coke of debased politics.

Before we recognize anyone as president, we must first establish a Provisional Government for the United States of America in accord with the Constitution.

That provisional government will devote its efforts to reestablishing a republic and a democracy based on the Constitution.

That effort can only be successful if we take the following six steps:  




1)

We will list the billionaires, investment banks, private equity funds and the other parasitic financial institutions that have taken control of our nation’s government and detail how they govern us illegally.

We will make all information public regarding their criminal takeover, and their criminal administration, of our country. We will bring criminal charges against the leaders, and seize their assets, regardless of how many politicians they own, or how many billions of dollars they claim to possess.


2)

We will take control of the economy, starting with money and finance (especially the Federal Reserve), and create an economy of the people, by the people and for the people.

The speculative economy will end and all fiscal policy will be drafted in close coordination with citizens using scientific data concerning the true short-term and long-term challenges facing our nation. For-profit organizations will play no role in the formulation of economic policy, nor will foreign economic concerns. Corporations whose stock is owned by foreign interests, that have their headquarters outside of the United States, will not be considered American.

3)

We will establish true journalism, starting with journalism produced by networks of patriotic citizens, that is dedicated to the pursuit of truth, and does not shy away from taboo subjects. This journalism will have no corporate sponsors and will be accompanied by social media networks and search engines that are run as regional and national cooperatives responsible to the people, that have pursuit of truth, not profit, as their paramount goal.


4)

We will establish an international committee of ethical citizens to oversee an investigation of the criminal actions by those pretending to be the United States government for the last twenty years. Base on the findings of those public investigations, we will make proposals for a revolutionary restructuring of the government so as to make the citizen again sovereign.

Only then will we be able to hold transparent and accountable elections for the President and the Congress that allow the citizens to vote on the basis of accurate information, elections from which corporate money and private wealth will be banned.

Criminal syndicates like the Democratic Party and the Republican Party, not described in the Constitution, will play no role in these open and fair elections.    

5)

We will set down national security priorities related to the threats facing our citizens. The process of assessing those security concerns will be immune from the lobbying of weapons manufactures and investment banks. We will consider crucial issues such as the collapse of biodiversity, the destruction of our climate, the concentration of wealth and the misuse of technology to destroy the minds of our citizens. We will also stop the use of automation and communications technology by corporations to destroy our livelihoods. We see the war of the rich against the citizens of the Earth as the primary security threat of our age.

6)

We will reform the United Nations so that it will become a space for true “Earth” governance that takes an internationalist perspective, and is not a tool for globalism. We will banish from the United Nations the money chargers and the plutocracy who have shredded the United Nations Charter and made its employees into their lapdogs.


 
The demands are simple, but achieving them will require vision, inspiration, tenacity and sacrifice. The rebuilding of the United States, in accord with its sacred Constitution, will be both a national and an international project.

We call out to all Americans, to all patriots who can hear our voices, and especially to those who were lucky enough to receive outstanding educations, privileged enough to obtain specialized training in the sciences, in international relations, in economics and in medicine. It must be you! Lawyers, doctors, professors, technicians, government officials, corporate executives and business owners! This is your moment of truth.

This is the moment when you must choose to stand with the downtrodden, choose to help citizens, who have not been so fortunate as you have, to distinguish truth from falsehood.

Those who possess extreme riches are not your friends. They care no more for you than they do for the homeless.

We declare today that in our streets, in our neighborhoods, in our states and in our nation, the United States of America, the super-rich and their minions shall have no dominion. The government titles or institutional trappings that they have stolen, or bought, grant them no authority over us.

If truth slips from our grasp, the powerful can easily twist our sentiments. The evil that they stir up shifts patterns, so as to blend into any scene, like a moth, like a chameleon. 

Our provisional government will adhere to the constitution, to the sacred truth and to our moral indignation. We know no other masters.   

“I Shall Fear No Evil” goes global

My book “I Shall Fear No Evil” has been translated into multiple languages as we make this campaign to save the United States, and the entire Earth, into a global effort.

for downloads of the books, select the appropriate language at emanuelprez.com

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「ワシントンに対する目に見えない攻撃」 ジョー·バイデン大統領就任式に付す

「ワシントンに対する目に見えない攻撃」

ジョー·バイデン大統領就任式に付す

エマニュエル パストリッチ 

2021年 1月 20日

大変申し訳なく、惨憺たる気持ちで米国で発生した今回の事件について申し上げたいと思います。今回の事件は、ワシントンD.Cを襲い、アメリカ各州まで広がり、この小さな青い緑の惑星や世界中までを揺るがしました。このような侮辱的な混乱は、ジョージ·ワシントン大統領やエイブラハム·リンカーン大統領の謙虚な努力とはあまりにも比較され、むしろ旧ローマ帝国のネロ皇帝とカリグラ皇帝の狂暴な統治に比喩するのがより適切だと言えるほど、痛嘆すべき事件でした。本当に悲しい日でした。

結局、私たち全員が直面する挑戦はより大きくなり、危険はさらに緊迫したものになりました。しかし、逆に、この危機によって新しいことを成し遂げることができる激動力が誕生したと見ることもできます。つまり、過去の帝国の腐敗と国内の葛藤、分裂の泥沼に戻るのではなく、理想的で肯定的な共和国を蘇らせようとする皆の心のこもった意志で方向調整を行う必要があります。

ローマ皇帝マルクス·アウレリウスのかいたことによると、「あなたがもし恐怖や期待なしにあなたの使命を受け入れることができれば達成感を得りことができるだろう。あなたが天の意図にふさわしく「超人間的な真実性」を持てば、人生は幸せになるだろう。」

肯定的な思考へ進める唯一の道は、面白い伝説や華やかな神話ではなく、超人的真実性にあるということです。少し前、または過去数年間経験した悲惨な試練は、私たちが知らない方法で試験を受け、私たちを阻んでいたものが道になるようにするためのものです。

ある意味、我々が科学的方法に基づいた完璧で透明な国際的合同による徹底した調査が行われるまでは、国会議事堂に潜り込んだ攻撃について、今のところはいかなる中途半端な言及も慎むべきだと思います。

残念ながら、私たちには時間があまりありません。 これは4年ごとに繰り返される平凡な選挙でもありません。

おそらく、私たちは現時代の状況を火山の爆発のように受け止めなければなりません。何年にもわたってアメリカ社会で起きた、あたかもそれとなく進行してきた地質学的変化のように察知しにくくて、まるで何十年も何も起こらないように見えますが、その数十年はたった数日間、もしくは数時間で過激に進むこともあり得るのです。

とうとう溶岩のように荒くて原始的な政治の変化が起こり、傾斜の面を崩壊させ、巨大な山火事へと広がっています。我々がどのような国家、どのような地球にするかというビジョンを持つなら、我々は瞬間を捉えることができ、放出された力を肯定的な方向に誘導することができます。 溶岩が冷めると固くなるがごとく、堅固な制度の伝統や価値に耐えることができるように、現世代と次の世代が何世紀も享受して耐えなければなりません。

対照的に、現在、私たちが直面する挑戦に忠実でなければ、私たちが何らかの計画や方向もなく、例えば破壊の神であるシバに鍵を渡す場合、すなわち、人間のホーラブルナ本能的破壊力にまかせた場合、その溶岩の冷却によって形成される壁は、明らかに私たち全員を分裂させ、今後も何世紀もの間、私たちを、いかなる文明の発展的希望から隔離させることは明らかな事実なのです。

はい、そうです。ここ数日、アメリカに恐ろしい攻撃があり、ここ1年、恐ろしい伝染病が私たちを襲ってきました。

しかし、いざあの無惨な攻撃は、アメリカの国会議事堂では起きませんでした。実際、米国民すべてに加えられた攻撃は、多国籍投資銀行によって、そして資産管理および財政連合とシェル会社の系列会社の後ろに隠れ、私募ファンド会社によってまたスーパーリッチによって行われたもので、すべての連邦政府の実権が丸ごと彼らに引き渡されたというのが真の攻撃の結果だったことを直視しなければなりません。

マーティン·ルーサー·キング牧師は、「毎年政府の福祉プログラムより、軍事力と防衛費により多くの金を支出する国家は必ず国家として·霊的な死を迎えるだろう」と警告しました。

今後、私たちが、そして皆さんがすべきことについて言及する前に、まずCOVID-19に関する内幕と、これまでに何があったのかについて話をしたいと思います。

COVID-19ウイルスは、米国という社会のすべての四肢とすべての機関を感染させ、我らの頭の後ろに深く隠密な繁殖をする悪循環というDNAを植えつけました。このCOVID-19は、かつて世界に多くを提供していた国を頭から足まで感染させました。

文化とすべての制度、機関を飲み込んでしまうこの無惨な病気の起源は依然として曖昧だが、急速に拡散した我が国の惨憺たる道徳的破産と、また立派な高等教育を受ける幸運を享受し、余暇をもって経済、政治、歴史と哲学について学ぶことができる機会を持った人々の道徳的·倫理的堕落と汚され、良心によって、平凡な市民までもが真実な情報に接することができる機会が消えてしまいました。

暖かい特権に包まれていたそれらの恵まれたアメリカ人たちは、より偉大な善に貢献する彼らの役割に完全に失敗しました。 彼らはコロナという文明伝染病から解放される可能性のある最小限の機会さえ拒否しました.

幸運と特権を享受してきた私たちは、私たちが占めている利益を守り、防御することに目を向けてはいけません。私たちが享受した教育、技術は、すべての市民とともに分かち合うべき贈り物です。

何よりも、私たちは、常に私たちの心の目に、コンビニで夜遅くまで働く人々、そしてガソリンスタンドで事務所を雑巾がけしてゴミ箱を空ける人々、そして今ホームレスと高速道路に沿って昨日の夜、中途半端に立てた段ボール壁の裏に集まっている貧しい人々を心深く念頭に置き、力を入れて助けなければならないのです。

彼らには公正な機会が与えられていないだけであり、専門技術を学んだり、物理学と技術を理解したり、学ぶ機会がなかっただけです。 人間としての義務と責任を常に考えながら、彼らは私たちの心の中で最優先にならなければなりません。 私たちは彼らを助け、彼らを保護しなければなりません。 それはすべての政治のための礎石、つまり基礎となるべきです。

我々は我が国が停滞と高潮を繰り返す理念の摩擦や、世界の強力な勢力と毅然とした関係を持つ軍隊内の派閥間の勢力争いに巻き込まれないよう、抵抗しなければなりません。 私たちは、負傷したライオンの周りに集まったハイエナのように、あるいは豚が口をどこにでもほじくるように、低質で醜くなってはいけません。

私たちには超財閥の操り人形や寄生虫のような下積みで低級な行動は必要ありません。我々は、我々が寝ている間、ワシントンD.Cを占領した隠れた勢力に対抗する行動が必要なだけです。

フランクリン·D·ルーズベルト大統領が言ったように、「私たちは 金融独占、投機、無分別な銀行、階級間の敵対感、部分主義、戦争を利用した暴利という古い平和の敵と闘わなければなりません。 彼らは、アメリカ政府を自分の仕事に単なる服属品とみなし始めました。 われわれは、組織された金で運営される政府は組織暴力団体が操る政府と同じくらい危険だということを自覚すべきです」。

私たちは、すべてのアメリカ人と地球全体の人々の暮らしの経済的基盤を破壊する目的で計画されたCOVID-19詐欺を非難しなければなりません。その詐欺の背後勢力は、積極的で組織的な抵抗にのみ反応するため、我々は彼らに立ち向かわなければなりません。彼らの致命的な計画には理性と妥協は存在しません。

私たちは彼らのマスクを破り、真実と科学の明るい光の中で私たち自身のマスクをも破らなければなりません。

私たちはすでに国会議事堂に対する攻撃がどのように悪用されるかを知っています。

それは、その演劇の裏に実質的に存在する勢力を発見する手段ではなく、むしろその隠れた勢力が、米国のすべての自由言論を徐々に弾圧できるようにする、新たな911を作ることができるということです。

私は合同参謀本部の構成員たちの意図を疑うことを恐れません。

彼らは皆、大金を操られる政治家であり、共和国という棺おけに最後の釘を打つ、このような動きのすべての部分です。 911を目撃して陰で喜んだように。

すでに悪魔の法案は「愛国法」の制限を新たな次元に引き下げ、国内のあらゆる抗議、新しいワクチン政策に対するあらゆる疑問、批判を不法及び犯罪者として追いつめる準備をしています。

私はドナルド·トランプ大統領やジョー·バイデン上院議員に対する個人的な敵対感を持ってはいけません。 二人とも壊れて損傷したシステムの下で最善を尽くしました。 しかし、彼らのうち誰も大統領になる資格はなく、どちらも非合法的です。 政府全体が腐敗で崩壊したため、選挙はそもそも合法的に行われるはずがなかったのです。

かつて政府があった場所には不正腐敗だけがあり、結局、「金遊びのための支払い」だけが残っています。

ハーバード大学がCOVID-19を誇大広告するゴールドマン·サックスの道具になりましたが、FDA米国食薬庁は、多国籍企業が注文した危険なワクチンを押し付ける時、ワシントンポストとウォールストリート·ジャーナルは自分の個人的趣向によって人類全体を皆殺しようとする億万長者の歪んだ意志によって実行されており、私たちはみなそれに気づかなければなりません。

私は今日国内外のすべての道徳的責任感を持つアメリカ人に、直ちに良心から湧き出る行動を取るよう促しています。 誰も認めてもらえず感謝してもたえない寂しいことをしています。 

私は本日から、自由と正義に専念するアメリカのすべての市民を一か所に集めるためにたゆまぬ努力でこの場を占めることを厳粛に誓います。

合法的な選挙があるまで、または私よりももっと資格のある有能な人が現れるまで、この闘争を続けることを誓います。

米国と国連を抜本的に改革する準備ができた大統領が必要です. 同時に、そのような意志のある市民も必要です。

アメリカの政治的伝統とアメリカの統治の根は民主主義に基盤を置いていますが、その根と精神、根本的なインスピレーションは、1776年のアメリカ革命と1860年の奴隷制度に対する革命にさかのぼるということを思い起こさせていただきたい。 我々の伝統は革命的であり、その伝統が絶対的に重要な時期です。

独立宣言文を読んで差し上げます。

今日のコメントはある意味で二回目の「独立宣言」だからです。

今度はこれは大英帝国からの独立ではなく、億万長者とその召使いが運営する狡猾な金融帝国からの独立宣言です。

私たちは腐敗と略奪の帝国の搾取から、国家間の分裂と戦争から、国際的マスコミ操作、ファストフードと不必要な薬物と保険諸国からの独立を宣言します。

わが国父が言及したところによりますと、 

「私たちはすべての人間が平等に創造され、創造主から譲渡できない権利を与えられており、生命、自由、幸福を追求することができる真理を自明にしており、このような基本権利を確保するために、政府は政府間の同意から自分の正当な権力を導き、もしかすると体制の交替時に、それを変えたり廃止して新しい政府を立てることもまた国民の権利であり、そのような原則に基づいてそのような形で権力を組織することが国民の安全と幸福に影響を及ぼす可能性が最も高いと信じるからです。(略)しかし、逼迫と虐待、回避の長い列車が絶対独裁の下で国民の権利を侵害した際には、そのような政府を果敢に捨て、未来のセキュリティと公正な社会のために新たな警備員を提供することが、真の政府の良心であり義務です」。

全くその通りです。 重要な民主主義の過程がまさに革命であり、単に進歩的で保守的な両辺社会間の詐欺性の濃厚な偽りの味、つまりペプシとコカコーラの間の愚かな政治的渦ではないはずです。

ジェファーソン曰く;

「昔から自由という木は地道に愛国者の血と暴君の血で育てられてきた。」

その当時も今も自明な事実です。

誰かを大統領に任命する前に、必ず次のことを遂行しなければなりません。

1)億万長者、投資銀行、私募ファンド、體裁の中に寄生し、国を掌握するすべての陰険な金融機関を羅列し、暴露する具体的な方法を提示しなければなりません。

a) 最近の金融犯罪行為に関するすべての情報は、公開されます。

(機密解除及び国家危機の理由により非公開契約で発表);

b) 犯罪容疑は当然追及され、責任ある人々によって提起されます。 数十兆ドルをつぎ込んだ億万長者を含め、彼らの策略に巨額を投資し、または参加したすべての犯罪人が含まれています。

2) 国民が貨幣と金融(連邦金融理事会)を皮切りに、経済の全体の主権を掌握し、国民が国民のための経済を創出していきます。 グローバル投機の怪物を抹殺する方法に対する計画はたくさんあります。 必要であれば強制施行も可能です。

3) 真実を追求する市民で構成された団体を動員して、透明な言論の新しい形態を設立し、タブーを恐れずRCA victorから出てくる主人の声にだけ服従する犬のように、大企業後援者にだけ全面的に奉仕する腐敗した言論は迅速に代替されるでしょう。

4) 国際倫理市民委員会を形成し、大統領と議会の公正な選出を監督し、市民が参加できるようにし、また、資格を持つすべての候補者が、建設的な提案に対する平等で適切な露出を得られるプロセスを構築するための、全ての大企業の密かな後援や資金は、当然遮断されるでしょう。

5)国連を地球人のための真の地球統治機関にし、国連憲章で提示した親人類的理想を今まで破壊してきた投資者、融資、お金遊びの味を覚えたすべての億万長者を、永久に除去する国連改革案も出す予定です。

6)グローバル投資銀行と、企業の友人同士による生物多様性に対する脅威と破壊と気候変化に積極的に対応し、少数に極度の富が累積することを積極的に制裁します。また、技術、特に自動化および通信技術が国民の心と生計を破壊しているため、その弊害を防ぐことに焦点を合わせて国家安保の優先順位を設定します。

実現すべき事項は簡単ですが、それを達成する道は至難でしょう。 私が提示する人類の未来は、国家的、世界的な全ての地球人一人ひとりの参加による闘争を要求します。我々は、その道を共に歩む勇気とインスピレーションを必要とします。理性と論理に基づいた理念を納得する瞬間、自然により多くの意識ある人々が参加することでしょう。

私はこの過程を主宰する臨時の主宰者の役割を提案するわけですが、私は権力や財物への欲はありません。 古代ローマ帝国のシンシナトゥス将軍のように、私は社会改革が完成段階に至れば、ある時点で退く用意があります。

市民の皆さん、このゲームのボールは あなたの手元へ渡りました。 私たちは良心的共和国の再建のため、皆さんと一緒に前に進む準備ができています。 そして、その第一歩を踏み出す者は、まさに皆様です。

真実は止まらず行進を続けます。

ご傾聴頂きまして、再度、ご感謝いたします。